August 30, 2026

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कोरोना वायरस संक्रमण के हालात बेकाबू हों तो 2 हफ्ते के लॉकडाउन पर विचार करे यूपी सरकार: हाई कोर्ट

नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच उत्तर प्रदेश के हालात भी बेकाबू हैं।इस बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बार फिर यूपी सरकार को नसीहत दी है।मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार से राज्य में ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की अत्यधिक कमी को देखते हुए लॉकडाउन सहित विकल्पों की तलाश करने को कहा है।
2 हफ्ते के लॉकडाउन का अनुरोध
जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा की अगुवाई वाली पीठ राज्य में जारी कोविड संकट पर एक केस की सुनवाई कर रही थी।
इस दौरान जज ने कहा, ‘मैं फिर से अनुरोध करता हूं, अगर हालात नियंत्रण में नहीं हैं, तो दो सप्ताह का लॉकडाउन लगाने में देर न करें. कृपया अपने नीति निर्माताओं को इसका सुझाव दें. हमें लगता है कि चीजें नियंत्रण के बाहर हो चुकी हैं।
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हाई कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
जस्टिस वर्मा ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा, ‘डॉक्टरों की कमी है, स्टाफ, ऑक्सीजन की कमी है, कोई L1, L2 नहीं है।कागजों पर सब कुछ अच्छा है, लेकिन सच्चाई ये यह है कि सुविधाओं की कमी है और ये बात किसी से छिपी नहीं है।इसलिए हम हाथ जोड़कर, आपसे अपने विवेक का प्रयोग करने का अनुरोध करते हैं।गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के राज्य के 5 शहरों में लॉकडाउन लगाने के आदेश पर रोक लगाने के करीब एक हफ्ते बाद हाई कोर्ट की ये टिप्पणी सामने आई है।
पहले हाई कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश
हाई कोर्ट ने पिछले आदेश में लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, कानपुर नगर और गोरखपुर में स्थिति सामान्य करने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने को कहा था. अदालत ने निर्देश दिया कि इन शहरों के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में दिन में 2 बार स्वास्थ्य संबंधी बुलेटिन जारी करने की प्रणाली लागू होनी चाहिए, ताकि लोग मरीजों की सेहत का हाल जान सकें और तीमारदार अस्पताल जाने से बच सकें.
अदालत ने निर्देश दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक जिले में सभी सरकारी कोविड-19 अस्पतालों और संक्रमण के इलाज के लिए निर्धारित निजी अस्पतालों एवं कोविड-19 केंद्रों में प्रत्येक व्यक्ति की मौत की सूचना एक न्यायिक अधिकारी को दी जाए, जिसकी नियुक्ति जिला न्यायाधीश द्वारा की जाएगी।
यूपी सरकार से मांगा था जवाब
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यूपी सरकार इन शहरों के अपने जिला पोर्टल पर सभी अस्पतालों में कोविड-19 वार्ड और आईसीयू में भरे हुए और खाली बिस्तरों की स्थिति बताए. अदालत ने कहा कि केवल एंटिजन जांच रिपोर्ट में व्यक्ति के संक्रमणमुक्त होने की पुष्टि ही किसी मरीज को अस्पताल से छुट्टी देने का आधार नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इस तरह के मरीज दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं. उसने कहा कि उन्हें कम से कम एक सप्ताह के लिए गैर कोविड-19 वार्ड में भर्ती रखा जाना चाहिए.
अदालत ने लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर नगर, आगरा, गोरखपुर, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और झांसी के जिला न्यायाधीशों से एक-एक न्यायिक अधिकारी नामित करने का अनुरोध किया, जो अपने-अपने जिलों में नोडल अधिकारी के तौर पर काम करेंगे और हर वीकेंड में महानिबंधक को रिपोर्ट करेंगे. इस रिपोर्ट को सुनवाई की अगली तारीख तीन मई, 2021 को अदालत के समक्ष पेश किया जाना था।

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