August 30, 2026

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ग्रेटर नोएडा इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट 54वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2022 मे सोर्सिंग, प्रेरणा, योजना और अधिक आपूर्तिकर्ताओं के वैल्यू चेन में जुड़ने से आयोजन बना क्रेताओं के लिए संपूर्ण अनुभव।

ग्रेटर नोएडा – 17 अक्टूबर 2022 – “आईएचजीएफ दिल्ली मेला हस्तशिल्प निर्यातकों का दुनिया की सबसे बड़ा एकत्रीकरण आयोजन होने के अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है और अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन है। यह स्थल, इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, दुनिया भर से व्यापार आगंतुकों की अगवानी कर रहा है, प्रेरणा संकलित कर रहा है, पुराने संपर्कों को नए आयाम पर ले जाने का गवाह बन रहा है।

अपनी सोर्सिंग श्रृंखला में नए आपूर्तिकर्ताओं को जोड़ रहा है, नई श्रेणियों के साथ उत्पाद आधार को व्यापक बना रहा है और हस्तशिल्पी परिधान, रैंप शो में फैशन ज्वैलरी और एक्सेसरीज, के लाइव प्रदर्शन पर उत्साहित हो रहा है हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के चेयरमैन श्री राज के मल्होत्रा जो ने बताया। आईएचजीएफ दिल्ली मेला स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री अवधेश अग्रवाल ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “मेला स्थल पर सुविधाओं और आयोजकों द्वारा की गयी परिवहन व्यवस्था की कई विदेशी आगंतुकों द्वारा सराहना की जा रही है। कई लोग ऐसे भी हैं जो अपने व्यवसायिक वार्ता और डील से ब्रेक लेते हैं तो वे खुद को ‘भारतीय शरद ऋतु’ की हवा यहां के वातावरण और यहां की उत्सवधर्मिता में सराबोर कर रहे हैं।”

 

अमरीका के फर्नीचर आयातक जेसन मुलवेन आईएचजीएफ में अपने नियमित प्रदर्शकों से मिलने वाली विविधता से खुश हैं और आमतौर हर बार उन्हें अपनी सोर्सिंग के चुनने के कई विकल्प मौजूद होते हैं। इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा “भारतीय उत्पाद हमारे कुल व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा हैं और मुझे अपने बाजार में इन उत्पादों के लिए अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है,”। नॉर्वे के एक खरीदार अर्नफिन एंगेसेट कहते हैं, उन्होंने इस मेले के हर एक संस्करण में भाग लिया है और हर बार आयोजन में उत्पादों की संख्या और विकल्पों में हो हो रहे इजाफे से बेहद खुश हैं। वह यहां इंटीरियर डेकोर उत्पादों की सोर्सिंग के लिए आए हैं। जर्मनी के लुइस मॉरिस रीड होम डेकोर के ऐसे ही एक और नियमित खरीदार हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पाद उत्कृष्ट शिल्प कौशल से आकर्षित होते हैं।ईपीसीएच के महानिदेशक और आईईएमएल के अध्यक्ष राकेश कुमार, ने साझा किया, “जहां हॉल में प्रदर्शकों को उनका हक और वाजिब व्यवसाय मिल रहा है, वहीं कई क्षेत्रीय कारीगर और आने वाले उद्यम हैं जो अपने हिस्से का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे शिल्पियों में कुछ ऐसे कारीगर और नए और नवोदित उद्यमी हैं जो आईएचजीएफ दिल्ली मेले में एक थीम क्षेत्र में रखे गए इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट (आईईएमएल) के ई-नर्चर कार्यक्रम का हिस्सा हैं। धातु शिल्प से लेकर हाथ से बुने हुए शॉल, हथकरघा, चीनी मिट्टी की चीज़ें, कागज शिल्प, सुई शिल्प आदि के संग्रह के साथ, वे ऑर्डर और पूछताछ के लिए कई व्यापारिक आगंतुकों को आकर्षित कर रहे हैं। उनमें से कुछ ने बड़े विदेशी बाजारों तक पहुंचने के लिए स्थापित निर्यातकों के साथ सफलतापूर्वक नेटवर्क बनाया है। एक कौशल विकास और विश्वास निर्माण प्रक्रिया के माध्यम से हस्तशिल्प निर्यात खंड में ये नए प्रवेशकर्ता एक्सपोबाजार जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पादों का विपणन कर रहे हैं“आईईएमएल का ई-नर्चर कार्यक्रम एक सीएसआर पहल है और छोटे व्यवसायों के लिए उत्पाद विकास, व्यापारिक अवधारणाओं, उपभोक्ता प्रवृत्तियों, ई-कॉमर्स फोटोग्राफी, गुणवत्ता आश्वासन, सूची, पैकेजिंग, रसद और वित्त जैसे व्यावसायिक कौशल प्रदान करने और तेज करने का प्रयास है और उनकी मदद करता है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पादों का विपणन अंततः आय बनाने और बढ़ाने और निरंतर आजीविका में परिणाम देता है।एक्सपो बाजार एक बी2बी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो होम और लाइफस्टाइल सेगमेंट में हाथ से तैयार किए गए उत्पादों और मर्चेंडाइज की पेशकश करता है, जो भारत के सर्वोत्तम पैमाने, विविधता, कौशल, सामग्री, व्यापार और उद्योगों की समृद्ध विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। यह कारीगरों, छोटे निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं के जीवन पर उनके व्यापार को सम्मान देकर और लुप्तप्राय कला और शिल्प को संरक्षित करने में मदद करके उनके जीवन पर एक सामाजिक, सांस्कृतिक और वित्तीय प्रभाव पैदा करने के लिए भी समर्पित है।ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री आर के वर्मा ने बताया, “आज उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री डॉ. रघुराज सिंह; श्री विजय कुमार सिंह आईएएस सचिव, भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग और मयूर माहेश्वरी, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीएसआईडीए) सीईओ एवं एनआरआई सेल के प्रभारी ने आईएचजीएफ दिल्ली मेले का दौरा किया।” उन्होंने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि “मैनेजिंग आर्गनाइजेशनल प्रोडक्टिविटी एंड बू्स्टिंग आर्गनाइजेशनल सिजिटनशिप, फॉरेक्स सॉल्यूशन एंड रूपी एसेक्पिबिलिटी इन वर्ल्ड मार्केट्स, और एमएसएमई के लिए सिडबी की प्रचार योजनाओं पर सेमिनारों में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिभाग किया। इसके साथ ही लगातार चौथे दिन रैंप प्रेजेंटेशन, अपनी सारी ऊर्जा, जीवंतता और उत्पाद विविधता के साथ, भीड़ को आकर्षित करना जारी रख रहा है।इस अवसर पर ईपीसीएच के महानिदेशक और आईईएमएल के चेयरमैन डॉ. राकेश कुमार ने सूचित किया कि ईपीसीएच दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों और सेवाओं के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में विदेशों में भारत की छवि बनाने के लिए जिम्मेदार एक नोडल संस्थान है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 33253.00 करोड़ (4459.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जिसमें बीते वर्ष की तुलना में रुपये के संदर्भ में 29.49% और डॉलर के संदर्भ में 28.90% की वृद्धि दर्ज हुई है।

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